जबलपुर। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए एक वीडियो ने गोरखपुर पुलिस पर हिरासत में मारपीट के गंभीर आरोप लगाए, लेकिन अब इस पूरे मामले में पुलिस ने दस्तावेजों के साथ ऐसा जवाब दिया है, जिसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का दावा है कि वायरल वीडियो में खुद को पीड़ित बताने वाला व्यक्ति सतीश सोनकर कोई निर्दोष नागरिक नहीं, बल्कि वर्षों से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त एक आदतन अपराधी है। इतना ही नहीं, पुलिस ने उसके खिलाफ दर्ज मामलों का रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और थाने के सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
गोरखपुर थाना पुलिस के अनुसार 5 जुलाई को नियमित पेट्रोलिंग के दौरान महर्षि स्कूल के सामने सूचना मिली कि एक व्यक्ति अवैध शराब बेचने की फिराक में खड़ा है। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और सतीश सोनकर के कब्जे से 21 पाव मूनलाइट देशी शराब बरामद की। इसके बाद उसे थाने लाकर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस का दावा— कानूनी कार्रवाई के बाद सही-सलामत छोड़ा गया
पुलिस का कहना है कि दर्ज अपराध जमानती होने के कारण आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर आरोपी को नियमानुसार छोड़ दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक वह पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अपने पैरों से चलकर थाने से बाहर गया। इस दावे के समर्थन में पुलिस ने थाने के सीसीटीवी फुटेज और मौके की तस्वीरें भी जारी की हैं।
फिर अचानक क्यों लगे मारपीट के आरोप?
पुलिस के मुताबिक थाने से बाहर जाने के कुछ समय बाद सतीश सोनकर दोबारा लौटा और पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाने लगा। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उसका तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया गया, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी कोई चोट सामने नहीं आई, जिससे पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने की पुष्टि होती हो।
20 साल का रिकॉर्ड सामने, पुलिस ने खोली पूरी हिस्ट्रीशीट
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने ICJS (Interoperable Criminal Justice System) और थाना गोरखपुर के रिकॉर्ड के आधार पर आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सार्वजनिक किया। पुलिस के अनुसार वर्ष 2006 से 2026 के बीच उसके खिलाफ कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं और अनेक मामलों में न्यायालय में आरोप-पत्र भी पेश किए जा चुके हैं। इसके अलावा उस पर कई बार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और बाउंडओवर की कार्यवाही भी की जा चुकी है।
वायरल वीडियो की होगी फोरेंसिक और विभागीय जांच
गोरखपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, पोस्ट और आरोपों की विभागीय स्तर पर गंभीरता से जांच की जा रही है। यदि जांच में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने, झूठी जानकारी फैलाने या पुलिस की छवि धूमिल करने का प्रयास सामने आता है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच पर टिकी हैं निगाहें
यह मामला अब केवल एक वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता की भी परीक्षा बन गया है। एक ओर पुलिस अपने दावों के समर्थन में सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिपोर्ट और आपराधिक रिकॉर्ड पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर वायरल आरोपों की भी जांच जारी है। अब सभी की नजरें विभागीय जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
