EOW का बड़ा खुलासा: लगान और डायवर्सन के नाम पर 6 लाख से ज्यादा की ठगी, जाली चालान देकर वर्षों तक करता रहा खेल
जबलपुर/सिवनी। राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और भू-स्वामियों से सरकारी लगान एवं डायवर्सन शुल्क के नाम पर लाखों रुपये वसूलने वाला एक पटवारी सरकारी खाते में राशि जमा कराने के बजाय अपने निजी खाते में पैसे मंगवाता रहा और बदले में फर्जी सरकारी चालान थमाकर लोगों को गुमराह करता रहा।
मामले का खुलासा होने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने सिवनी में पदस्थ पटवारी अरुण कुमार सनोडिया के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में करीब 6 लाख रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जबकि जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह राशि और भी बढ़ सकती है।
सरकारी टैक्स के नाम पर PhonePe से वसूली
EOW की जांच में सामने आया है कि आरोपी पटवारी किसानों और भू-स्वामियों से लगान, डायवर्सन और अन्य राजस्व मदों की राशि सीधे अपने PhonePe अथवा निजी खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करवाता था। इसके बाद वह सरकारी ट्रेजरी जैसा दिखने वाला फर्जी चालान तैयार कर संबंधित व्यक्ति को दे देता था।
पीड़ितों को लंबे समय तक इस धोखाधड़ी का पता नहीं चला। लेकिन जब टैक्स जमा होने के बावजूद राजस्व विभाग से बकाया वसूली के नोटिस आने लगे, तब लोगों ने सरकारी पोर्टल पर रिकॉर्ड जांचा। वहां कोई भुगतान दर्ज नहीं मिला और पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू हो गईं।
एक शिकायत ने खोल दी करोड़ों की आशंका वाली साजिश
मामले की शुरुआत सिवनी के एकता कॉलोनी निवासी राजकुमार साहू की शिकायत से हुई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 से 2025 तक के मकान कर के रूप में 5,400 रुपये पटवारी के कहने पर ऑनलाइन ट्रांसफर किए थे। बदले में उन्हें सरकारी चालान दिया गया, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर उसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में चालान पूरी तरह फर्जी निकला।
89 हजार का फर्जी चालान, फिर खुलने लगे राज
इसके बाद रामकुमार कुशवाहा ने भी शिकायत की कि उन्हें 89,550 रुपये का फर्जी चालान दिया गया। लगातार शिकायतें मिलने पर तत्कालीन एसडीएम ने जिला कोषालय अधिकारी से चालानों का सत्यापन कराया, जिसमें अधिकांश चालान सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं मिले।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पटवारी को तत्काल निलंबित कर दिया गया और प्रकरण EOW को सौंप दिया गया।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले मामले
केस-1: 44 हजार लिए, रिकॉर्ड में जमा दिखे सिर्फ 21 हजार
भूस्वामी सुनील नाहर ने खसरा लगान के लिए पटवारी को 44,846 रुपये ऑनलाइन दिए। आरोपी ने उन्हें दो चालान थमाए। जांच में पाया गया कि एक चालान की राशि सरकारी रिकॉर्ड में पूरी तरह दर्ज ही नहीं थी, जबकि दूसरे में वास्तविक जमा राशि काफी कम थी। इससे हजारों रुपये की हेराफेरी उजागर हुई।
केस-2: 5 लाख का चालान… लेकिन सरकारी रिकॉर्ड से गायब
सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब शीतलचंद्र भूरा के नाम से जारी 5.04 लाख रुपये के चालान की जांच की गई। ट्रेजरी और ऑनलाइन पोर्टल में यह चालान पूरी तरह गायब मिला। जांच एजेंसियों के अनुसार यह फर्जीवाड़ा सुनियोजित तरीके से किया गया और शासन को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
सरकारी सिस्टम की खामियों का उठाया फायदा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पटवारी ने वर्षों तक सरकारी व्यवस्था की कमियों का फायदा उठाकर किसानों का भरोसा जीता और फिर उसी भरोसे का दुरुपयोग करते हुए फर्जी चालानों का नेटवर्क खड़ा कर दिया।
EOW ने दर्ज किया अपराध
एसडीएम के प्रतिवेदन के आधार पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने आरोपी पटवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 361(5), 337, 336(3), 340(2) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इस फर्जीवाड़े में कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल था या नहीं।
जांच में बढ़ सकता है घोटाले का आंकड़ा
EOW अधिकारियों का मानना है कि अब तक सामने आए मामले सिर्फ शुरुआती कड़ियां हैं। जैसे-जैसे पुराने रिकॉर्ड और चालानों की जांच आगे बढ़ेगी, फर्जीवाड़े की रकम कई गुना बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कई अन्य किसानों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
