जबलपुर। जिले में कथित फर्जी पत्रकारों के खिलाफ चल रही मुहिम अब सोशल मीडिया पर खुली बहस और विवाद का विषय बन गई है। हाल ही में कलमवीर संघर्ष संगठन द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर फर्जी पत्रकारों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। इस पहल के बाद जहां बड़ी संख्या में पत्रकारों और नागरिकों ने संगठन के अभियान का समर्थन किया, वहीं अब कुछ लोग खुलकर इसके विरोध में सामने आने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक व्यक्ति द्वारा ऐसी पोस्ट साझा की गई, जिसमें कथित रूप से फर्जी पत्रकारों के पक्ष में समर्थन जताया गया। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने उस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया।
कमेंट्स में बड़े मीडिया संस्थानों के पत्रकार भी निशाने पर
विवाद तब और गहरा गया जब उक्त पोस्ट पर कुछ लोगों ने टिप्पणी करते हुए जिले के प्रतिष्ठित और बड़े मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ कमेंट्स में पत्रकारिता की कार्यशैली पर टिप्पणी की गई, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं को लेकर पत्रकार समुदाय में नाराजगी देखी जा रही है।
पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत या आरोप हैं तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन पूरे पत्रकार समाज या प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों पर बिना प्रमाण टिप्पणी करना उचित नहीं है। इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता और समाज में उसकी भूमिका प्रभावित होती है।
संगठन की मुहिम को मिल रहा समर्थन
कलमवीर संघर्ष संगठन का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आड़ में कथित रूप से चल रही ब्लैकमेलिंग, अवैध वसूली और फर्जी पहचान के खिलाफ है। संगठन का दावा है कि यदि समय रहते ऐसे तत्वों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वास्तविक पत्रकारों की छवि धूमिल होती रहेगी।
संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि फर्जी पत्रकारिता का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है और अब इसे निर्णायक स्तर तक ले जाने की आवश्यकता है। यही कारण है कि प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
सोशल मीडिया बना नया अखाड़ा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी दो खेमे बनते नजर आ रहे हैं। एक पक्ष फर्जी पत्रकारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे पत्रकारों को बदनाम करने की साजिश बताने में जुटा है। फेसबुक पोस्ट और उस पर आए कमेंट्स को लेकर शहर में चर्चा का माहौल है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
पत्रकार संगठनों और नागरिकों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हुई हैं। लोगों का मानना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाती है तो विवाद स्वतः समाप्त हो सकता है। फिलहाल सोशल मीडिया पर जारी इस बहस ने पत्रकारिता और उसकी विश्वसनीयता को लेकर एक नई चर्चा छेड़ दी है।
