भोपाल में CBI का सीन रीक्रिएशन- मददगारों की तलाश में CBI
भोपाल। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को मामले की तह तक पहुंचने के लिए घटनास्थल पर सीन रीक्रिएशन किया। सीबीआई टीम सास पूर्व जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को लेकर मौके पर पहुंची, जहां करीब 80 किलो वजन की डमी को फंदे पर लटकाकर घटनाक्रम को दोहराया गया। टीम ने लगभग दो घंटे तक घटनास्थल की परिस्थितियों और अब तक मिले साक्ष्यों का मिलान किया।
जांच के दौरान डमी का वजन ट्विशा के बराबर रखने के लिए उसमें रेत भरी गई और पैरों में लोहे के डंबल बांधे गए। सीबीआई यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना वाले दिन वास्तव में क्या हुआ था और क्या सामने आई परिस्थितियां आत्महत्या की कहानी से मेल खाती हैं या नहीं।
जबलपुर कनेक्शन पर भी फोकस
जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि 15 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी पति समर्थ सिंह तत्काल भोपाल से नहीं भागा था। सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार वह करीब तीन दिन तक भोपाल में ही रहा, इसके बाद जबलपुर पहुंचा और यहां लगभग पांच दिन तक फरारी काटता रहा। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में था और उसे किसने शरण या मदद उपलब्ध कराई।
डॉक्टर से होगी पूछताछ
सीबीआई ने उस डॉक्टर को भी पूछताछ के लिए तलब किया है जिसने ट्विशा को गर्भपात (अबॉर्शन) कराने की सलाह दी थी। एजेंसी यह जानना चाहती है कि गर्भपात से जुड़ी परिस्थितियां क्या थीं और क्या उनका ट्विशा की मानसिक स्थिति पर कोई प्रभाव पड़ा था।
आत्महत्या या हत्या?
ट्विशा की मौत के बाद से ही मामला आत्महत्या और हत्या के बीच उलझा हुआ है। पति समर्थ लगातार इसे आत्महत्या बता रहा है और दावा कर रहा है कि गर्भपात के बाद ट्विशा अवसाद में थी। हालांकि सीबीआई को अब तक ऐसे कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिले हैं, जिनसे घटना की वास्तविकता सामने आ सके।
फरारी में मदद करने वालों पर भी शिकंजा
सीबीआई अब समर्थ की कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और डिजिटल चैट की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के दौरान जबलपुर समेत अन्य स्थानों पर उसे किसने मदद पहुंचाई। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका आरोपी को संरक्षण देने या जांच से बचाने में सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
