‘कृष्णा होम्स’ का खेल बेनकाब! बिना अनुमति प्लॉटिंग, बिजली पर सवाल और खरीदारों से करोड़ों की वसूली?

खुद का ट्रांसफार्मर नहीं, सरकारी लाइन से कॉलोनी रोशन करने के आरोप; नियमों को ताक पर रखकर निर्माण का दावा

जबलपुर। शहर में अवैध कॉलोनियों और कच्ची प्लॉटिंग का कारोबार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। न्यू रामनगर, शांता माता मंदिर के पास विकसित की जा रही ‘कृष्णा होम्स’ कॉलोनी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कॉलोनी का विकास बिना आवश्यक अनुमतियों के किया जा रहा है, मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं और बिजली व्यवस्था भी नियमानुसार स्थापित नहीं की गई। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल अवैध प्लॉटिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों से भी जुड़ जाएगा।

जमीन पर क्या दिख रहा है?

स्थानीय लोगों का दावा है कि कृष्णा होम्स में 800 से 1000 वर्गफीट के सिंगल-स्टोरी मकान लगभग 50 से 55 लाख रुपये तक में बेचे जा रहे हैं, जबकि प्लॉट 2,500 से 3,000 रुपये प्रति वर्गफीट की दर से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आरोप है कि यह सब आवश्यक वैधानिक अनुमतियों के बिना किया जा रहा है।

बिजली व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल

स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि कॉलोनी के लिए नियमानुसार अलग ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं कराया गया। इसके बजाय आसपास के सरकारी विद्युत नेटवर्क से सप्लाई लेकर पूरी कॉलोनी को बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। यह भी आरोप है कि कॉलोनी के भीतर अस्थायी खंभों और पतली केबलों का उपयोग किया गया है, जिससे सुरक्षा संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं।

यदि जांच में यह सही पाया जाता है कि बिना स्वीकृत विद्युत अवसंरचना के कॉलोनी संचालित की जा रही है, तो इससे स्थानीय ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है और बरसात के मौसम में बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

नियम क्या कहते हैं?

सामान्य प्रक्रिया के अनुसार किसी भी नई कॉलोनी में विद्युत आपूर्ति शुरू करने से पहले स्वीकृत लेआउट के आधार पर विद्युत वितरण कंपनी से अनुमति लेना, आवश्यक क्षमता का ट्रांसफार्मर स्थापित करना, पोल एवं केबल का मानक अनुरूप निर्माण कराना और निरीक्षण के बाद ही विद्युत व्यवस्था शुरू करना आवश्यक होता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कृष्णा होम्स में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सिर्फ नोटिस, कार्रवाई क्यों नहीं?

रहवासियों का कहना है कि संबंधित विभागों द्वारा कभी-कभार नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन उसके बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि निर्माण और प्लॉटिंग नियमों के विपरीत हो रही है तो जिम्मेदार विभागों ने अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की?

मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव

स्थानीय नागरिकों के अनुसार कॉलोनी में अभी तक नियमानुसार—

  • पक्की सड़क नहीं,
  • नाली और सीवेज व्यवस्था नहीं,
  • स्वीकृत विद्युत अधोसंरचना नहीं,
  • अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं भी अधूरी हैं।

इसके बावजूद खरीदारों से बड़ी राशि वसूले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल—खरीदारों की सुरक्षा कौन करेगा?

यदि किसी कॉलोनी में वैधानिक स्वीकृतियां, सुरक्षित बिजली व्यवस्था और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो सबसे अधिक जोखिम वहां मकान या प्लॉट खरीदने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। भविष्य में बिजली, सड़क, नाली और अन्य सुविधाओं को लेकर विवाद होने की स्थिति में खरीदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, नगर निगम और विद्युत विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की संयुक्त जांच कराई जाए। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा खरीदारों के हितों की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

 

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