भवन शाखा में जनता परेशान, ‘दलाल तंत्र’ हावी होने के आरोप! नगर निगम के अहम विभाग पर उठे गंभीर सवाल
फाइलें अटकीं, अधिकारी तक पहुंच मुश्किल, कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा जांच पर भी सवाल; क्या होगी निष्पक्ष जांच?
जबलपुर। नगर निगम जबलपुर की भवन शाखा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नागरिकों और कुछ आवेदकों का आरोप है कि विभाग में कामकाज की रफ्तार बेहद धीमी है, अधिकारी तक सीधे पहुंचना कठिन हो गया है और फाइलों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब हो रहा है। आरोप यह भी हैं कि विभाग में बिचौलियों की सक्रियता इतनी बढ़ गई है कि आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि नगर निगम की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल है।
क्या भवन शाखा में बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है?
नगर निगम आने वाले कई लोगों का दावा है कि भवन शाखा में आवेदन जमा कराने से लेकर एनओसी और अन्य प्रक्रियाओं तक, उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। आरोप है कि कई मामलों में आवेदकों को सीधे अधिकारी से मिलने के बजाय कुछ कथित बिचौलियों के माध्यम से काम कराने की सलाह दी जाती है।
कुछ नागरिकों का कहना है कि जब तक फाइल कथित “सिस्टम” से होकर नहीं गुजरती, तब तक उसका निस्तारण नहीं होता। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भवन अधिकारी की उपलब्धता पर भी सवाल
भवन अधिकारी नवीन लोनारे को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। कुछ आवेदकों का आरोप है कि कार्यालय पहुंचने पर कई बार उन्हें अधिकारी उपलब्ध नहीं मिलते, जिससे जरूरी कार्य लंबित रहते हैं। इससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
यदि अधिकारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित रहते हैं, तो नगर निगम को उपस्थिति और जनसुनवाई की व्यवस्था सार्वजनिक कर इन शिकायतों का तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए।
कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे प्रश्न
हाल के दिनों में शहर के कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चाएं तेज हुई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि भवन शाखा द्वारा समय-समय पर भवनों, अग्नि सुरक्षा मानकों और आवश्यक अनुमतियों की प्रभावी जांच की जाती, तो संभावित जोखिमों को पहले ही रोका जा सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन भवनों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतिदिन आते हैं, वहां सुरक्षा मानकों का नियमित निरीक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।
जवाबदेही तय होगी या नहीं?
नगर निगम की भवन शाखा शहर में निर्माण संबंधी अनुमति, भवन मानचित्र, एनओसी और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी संभालती है। ऐसे में यदि विभाग के कामकाज पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा पारदर्शी जांच कराना आवश्यक हो जाता है।
शहर में यह चर्चा भी है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जांच से ही सामने आएगा सच
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—
- क्या भवन शाखा में कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच होगी?
- क्या फाइलों के लंबित रहने के कारण सार्वजनिक किए जाएंगे?
- क्या कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच होगी?
- क्या कोचिंग सेंटरों और अन्य व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा संबंधी अनुमतियों का विशेष ऑडिट कराया जाएगा?
- क्या नगर निगम आम नागरिकों के लिए पारदर्शी और समयबद्ध सेवा व्यवस्था लागू करेगा?
