जबलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जबलपुर दौरे और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान लागू किए गए ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वीआईपी मूवमेंट के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था में किए गए बदलावों का विरोध करने पहुंचे छात्र नेता को पुलिस ने प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही हिरासत में ले लिया।
जानकारी के अनुसार छात्र शक्ति युवा विंग के जिला अध्यक्ष नीरज शर्मा अपने साथियों के साथ रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। उनका कहना था कि जिस दिन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) आयोजित हो रही है, उसी दिन बड़े पैमाने पर लागू ट्रैफिक डायवर्जन और मार्ग अवरोधन से हजारों परीक्षार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
नीरज शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए छात्रों और अभ्यर्थियों की सुविधा की अनदेखी की गई है। उनका कहना था कि कई परीक्षा केंद्र ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं जहां पहुंचने के लिए विद्यार्थियों को प्रभावित मार्गों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में यातायात बाधित होने से परीक्षार्थियों के समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने में दिक्कत आ सकती है।
“छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता”
छात्र नेता का कहना था कि यदि ट्रैफिक जाम या डायवर्जन के कारण कोई परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाता और परीक्षा से वंचित रह जाता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दे पर आवाज उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई
हालांकि, विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए पुलिस ने नीरज शर्मा को एहतियातन हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर शहर में उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
हिरासत पर उठे सवाल
दूसरी ओर नीरज शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने आए थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर तक नहीं दिया गया।घटना के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। एक पक्ष जहां सुरक्षा कारणों से पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहरा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बता रहा है।
फिलहाल राष्ट्रपति केदौरे को लेकर शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और प्रशासन यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के दावे कर रहा है। वहीं छात्र संगठनों ने भविष्य में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
