पड़वार बना गंदगी का टापू: लाखों के बजट के बावजूद सरपंच-सचिव की चुप्पी, बीमारी को खुला न्योता
जबलपुर/बरेला। क्या प्रशासन किसी बड़ी महामारी का इंतजार कर रहा है? क्या ग्राम पंचायतों को मिलने वाला लाखों रुपये का बजट सिर्फ कागजों में ही खर्च हो रहा है? ये सवाल बरेला के समीप स्थित ग्राम पंचायत पड़वार की जमीनी हकीकत देखकर खुद-ब-खुद खड़े हो जाते हैं, जहां चारों ओर फैली गंदगी, बजबजाती नालियां और कचरे के ढेर ग्रामीणों के लिए अभिशाप बन चुके हैं।
गांव की तस्वीरें और स्थानीय लोगों की शिकायतें बताती हैं कि पड़वार में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं, कई स्थानों पर गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है और कचरे के ढेरों से उठ रही दुर्गंध ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालात इतने खराब हैं कि शाम होते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है और लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं।
लाखों का बजट गया कहां?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत को हर वर्ष स्वच्छता, नाली सफाई और ग्राम विकास के लिए मिलने वाला बजट आखिर खर्च कहां हो रहा है? यदि राशि खर्च हुई है तो जमीनी स्तर पर उसका असर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?
ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से न तो नियमित सफाई कराई गई और न ही कचरा निस्तारण की कोई प्रभावी व्यवस्था बनाई गई। ऐसे में पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सरपंच और सचिव की जवाबदेही पर सवाल
ग्राम पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था की सीधी जिम्मेदारी सरपंच और पंचायत सचिव पर होती है। लेकिन पड़वार की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदारों ने गांव को उसके हाल पर छोड़ दिया है। यदि समय-समय पर निगरानी और सफाई कार्यों की समीक्षा की जाती, तो शायद आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पंचायत प्रशासन सिर्फ बैठकों और कागजी कार्यवाही तक सीमित रह गया है?
बारिश से पहले ही हालात बदतर
मानसून अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुआ है और गांव की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलभराव और गंदगी की वजह से डेंगू, मलेरिया, टायफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।
यदि समय रहते सफाई अभियान नहीं चलाया गया तो आने वाले दिनों में यह लापरवाही ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।
जागेगा प्रशासन या बीमारी का इंतजार करेगा?
पड़वार की बदहाल तस्वीरें और ग्रामीणों की पीड़ा अब प्रशासन के सामने है। अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या जिम्मेदार सरपंच और सचिव से जवाब मांगा जाएगा, या फिर किसी बड़ी बीमारी के फैलने के बाद कार्रवाई का दिखावा किया जाएगा?
