जबलपुर। नगर निगम के भ्रष्ट सिस्टम और वातानुकूलित कमरों में बैठकर ऑल इज़ वेल की बांसुरी बजाने वाले अफसरों के मुंह पर कुदरत ने मंगलवार को ऐसा तमाचा मारा है कि जिसकी गूंज पूरे शहर में सुनाई दे रही है। मंगलवार दोपहर को आसमान से पानी क्या बरसा, नगर निगम की तथाकथित मानसून तैयारियों की सरेआम पैंट गीली हो गई। अभी तो मानसून ने ठीक से कदम भी नहीं रखा है, लेकिन महज आधे घंटे की बारिश ने संस्कारधानी को लबालब कर दिया। सड़कें समंदर बन गईं, चौराहों पर नाले उफनने लगे और निगम की घटिया इंजीनियरिंग का आलम यह था कि इनके द्वारा लगाए गए होर्डिंग्स के पोल ताश के पत्तों की तरह उखड़कर सड़कों पर आ गिरे।
जनता के घरों में घुसा गंदा पानी, बिकाऊ सिस्टम पर थूक रहे नागरिक
करोड़ों रुपये का बजट डकार कर नाला सफाई का जो ढोंग रचा गया था, मंगलवार को उसकी हकीकत गंदे पानी के रूप में लोगों के ड्राइंग रूम और किचन में तैरती नजर आई। शहर की निचली बस्तियों से लेकर पॉश इलाकों तक में गंदा, बदबूदार और कीचड़युक्त पानी लोगों के घरों में जबरन घुस गया। बेचारे टैक्सपेयर नागरिक हाथों में बाल्टी और बर्तन थामे दोपहर से लेकर रात तक अपने ही घरों से पानी बाहर फेंकने की मजदूरी करते रहे। आक्रोशित जनता का कहना है कि हर साल करोड़ों का चूना लगाने वाले इन सफेदपोशों और इंजीनियरों की मिलीभगत से नाला सफाई के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जाते हैं और मलाई बांटी जाती है।
रील्स वाले महापौर जी… जरा सड़कों पर आकर विकास का तैरता हुआ मुजायरा तो देखिए

फेसबुक और सोशल मीडिया पर रात-रात भर जागकर काम करने की नौटंकी करने वाले नगर निगम के हुक्मरान और रील्स चमकाने वाले महापौर जी, अगर लाज बची हो तो जरा बिना सुरक्षाकर्मियों के सड़कों पर निकलिए और अपनी इस कागजी सफाई का तैरता हुआ लाइव मुजायरा देखिए। जनता का साफ कहना है कि नेताओं और बिकाऊ अफसरों की चमड़ी इतनी मोटी हो चुकी है कि इन्हें जनता की इस बर्बादी से कोई फर्क नहीं पड़ता। इस पहली ही बारिश ने साबित कर दिया है कि पूरा जबलपुर इस बार डूबने वाला है।
अभी भी वक्त है… सुधर जाओ वरना जनता खदेड़ेगी

नगर निगम के मलाईदार पदों पर बैठे कुंभकर्णी नींद सो रहे अधिकारियों और कामचोर कर्मचारियों के लिए यह पहली बारिश एक ‘अंतिम चेतावनी’ है। होश में आने के लिए अब भी थोड़ा वक्त बाकी है! अगर नगर निगम के जिम्मेदार अफसर और मैदानी अमला अब भी अपनी गहरी नींद से जाग जाएं, भ्रष्टाचार की मलाई छोड़ ईमानदारी से धरातल पर काम करने लगें, और बंद पड़े नालों-नालियों की सफाई का काम सही तरीके से युद्ध स्तर पर पूरा कर लें… तो आने वाले पूरे बारिश के सीजन में जनता को इस नारकीय मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ेगा। लेकिन अगर इसके बाद भी साहब लोग कमीशनखोरी के खेल में ही मस्त रहे, तो याद रखें कि बारिश के पानी के साथ इस बार आक्रोशित जनता का गुस्सा भी सीधे नगर निगम के दफ्तर में घुसेगा!
