जबलपुर/भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा है कि कार्रवाई कानून के तहत हुई है और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. गुलरेज शेख ने जबलपुर में मीडिया से चर्चा के दौरान कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हों और पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करे, तो उसे राजनीतिक प्रतिशोध बताना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
“केवल नाना ही नहीं, कई कांग्रेस नेताओं पर दर्ज हैं मामले”
डॉ. शेख ने दावा किया कि नाना पटवारी के अलावा भरत पटवारी और इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष सदाशिव यादव सहित कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भी विभिन्न आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है, तो उसका स्वागत होना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता विवेक कृष्ण तन्खा पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी आरोपी को केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर संरक्षण नहीं मिल सकता।
कांग्रेस का आरोप—’सरकार डर गई है’
दूसरी ओर कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने हाल ही में राज्य में कथित भ्रष्टाचार और उज्जैन भूमि खरीद मामले को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने की घोषणा की थी। इसी के दबाव में सरकार ने उनके भाई के खिलाफ कार्रवाई कर विपक्ष को संदेश देने की कोशिश की है।
सूत्रों के अनुसार गिरफ्तारी की सूचना मिलने के बाद जीतू पटवारी ने अपने कानूनी सलाहकारों से चर्चा की है और मामले में आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।
नाना पटवारी पर दर्ज हैं कई मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार नाना पटवारी के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लगभग 10 आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए जाते हैं।
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें एक पुराने हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप था कि वे लंबे समय से फरार चल रहे थे।
इसके अलावा वर्ष 2025 में इंदौर के तेजाजी नगर थाने में दर्ज एक प्रकरण में शिकायतकर्ता नरेंद्र मेहता ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन पर कथित रूप से धोखे से कब्जा करने का प्रयास किया गया तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
महिला से छेड़छाड़ के आरोप भी रहे चर्चा में
नवंबर 2018 में नाना पटवारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354(क) के तहत एक मामला दर्ज हुआ था। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि नाना पटवारी सहित कई लोग हथियारों के साथ उसके घर में जबरन घुस आए थे और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
हालांकि इन मामलों में न्यायालय का अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
राजनीतिक संदेश क्या है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और विपक्ष द्वारा सरकार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलनों के बीच इस कार्रवाई ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।
भाजपा इसे कानून के राज का उदाहरण बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश के रूप में पेश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माने की संभावना है।
