पीड़ित कर्मचारी ने सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई शिकायत
जबलपुर। रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय में शर्मसार करने वाला मामले सामने आया है। उपकुलसचिव पर विवि के ही कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाकर सनसनी मची दी है। मामले की शिकायत कुलसचिव और सिविल लाइन थाने में की गई है। इस संबंध में उपकुलसचिव से दूरभाष में चर्चा करना चाही लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
जानकारी के अनुसार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीवीवी) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय के एक कर्मचारी ने उपकुलसचिव स्तर के अधिकारी पर गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाते हुए कुलसचिव तथा सिविल लाइन थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारी ने रुकी हुई वेतन वृद्धि बहाल कराने के एवज में कर्मचारी की पत्नी को अपने पास लाने और उससे संबंध बनाने जैसी आपत्तिजनक बात कही। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कर्मचारी संगठनों और विश्वविद्यालय कर्मियों के बीच भी इस शिकायत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
क्या है पूरा मामला’’
शिकायतकर्ता ’’रविंद्र कुमार तिवारी’’, जो कई वर्षों से रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं, ने अपनी शिकायत में बताया है कि उनकी दो वेतन वृद्धियां रोक दी गई हैं। उनका कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वेतन वृद्धि रोकने जैसे मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। रविंद्र तिवारी के अनुसार वे अपनी रुकी हुई वेतन वृद्धि बहाल कराने के संबंध में चर्चा करने के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारी ’’पवन साहू’’ से मिलने पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनकी समस्या का समाधान निकलेगा, लेकिन वहां जो हुआ उसने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर कर रख दिया।
पत्नी को लेकर आओ, वेतन वृद्धि बहाल करवा दूंगा
शिकायत में कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा कि उनकी वेतन वृद्धि बहाल करवाई जा सकती है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी पत्नी को उनके पास लेकर आना होगा। कर्मचारी का आरोप है कि अधिकारी ने उनकी पत्नी के अधिवक्ता होने और उसके सुंदर दिखने का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे मिलवाओ, उनके साथ संबंध बनाने में अच्छा लगेगा। शिकायतकर्ता ने कहा कि अधिकारी की यह बात सुनकर वह स्तब्ध रह गए और उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि एक जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति इस प्रकार की टिप्पणी कर सकता है।
पहले से चोटिल कर्मचारी को लगा मानसिक आघात
रविंद्र तिवारी ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि कुछ महीने पहले उनका सड़क दुर्घटना में एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। वर्तमान में उनका उपचार जारी है और वह शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ भी नहीं हो पाए हैं।ऐसी स्थिति में अधिकारी द्वारा की गई कथित टिप्पणी ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया। उन्होंने शिकायत में कहा है कि इस घटना के बाद वह तनाव और अवसाद की स्थिति में पहुंच सकते हैं। अधिकारी के कथित व्यवहार से उनके आत्मसम्मान, पारिवारिक गरिमा और मानसिक शांति को ठेस पहुंची है।
न्याय की मांग, कार्रवाई का इंतजार
पीड़ित कर्मचारी ने कुलसचिव और सिविल लाइन थाना से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि यदि इस तरह के मामलों पर कार्रवाई नहीं होती है तो कर्मचारियों का प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन पर उठे सवाल
मामले के सार्वजनिक होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल एक कर्मचारी के सम्मान का मामला है, बल्कि पूरे विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करने वाला विषय है। वहीं दूसरी ओर, शिकायत सामने आने के बाद अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। फिलहाल शिकायत की जांच प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है, जबकि आरोपित अधिकारी का आधिकारिक पक्ष अभी तक सार्वजनिक नहीं हो सका है।
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