2017 में विवाह खर्च के लिए लिया था उधार, भुगतान न करने पर न्यायालय ने सुनाई सजा
जबलपुर। वर्ष 2017 में विवाह के खर्च के लिए लिए गए ₹80 हजार के उधार का भुगतान न करना और दिया गया चेक बाउंस हो जाना आरोपी को भारी पड़ गया। चेक अनादरण (चेक बाउंस) के मामले में न्यायालय ने आरोपी को तीन माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए परिवादी को कुल ₹1,44,200 का भुगतान करने का आदेश दिया है।
प्रकरण के अनुसार, अर्पण सिंह ने वर्ष 2017 में अपने विवाह के खर्च के लिए नीरज मिश्रा से ₹1 लाख की आर्थिक सहायता मांगी थी। आर्थिक स्थिति को देखते हुए नीरज मिश्रा ने आरोपी को ₹80 हजार उधार दिए। कुछ समय बाद जब परिवादी ने अपनी राशि वापस मांगी तो आरोपी ने अपने बैंक खाते का ₹80 हजार का चेक सौंप दिया।
हस्ताक्षर और अपर्याप्त राशि के कारण लौटा चेक
परिवादी ने चेक को बैंक में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया, लेकिन वह हस्ताक्षर में भिन्नता और अपर्याप्त राशि के कारण अनादरित (डिशऑनर) हो गया। इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से आरोपी को विधिवत कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस की तामील होने के बावजूद आरोपी ने निर्धारित अवधि में चेक की राशि का भुगतान नहीं किया।
न्यायालय ने सुनाई सजा
इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ता ए.के. भगत एवं शिवम गुप्ता के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद 30 जून 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जबलपुर की अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने आरोपी अर्पण सिंह को तीन माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए परिवादी को ₹1,42,200 प्रतिकर तथा ₹2,000 परिवाद व्यय अदा करने का आदेश दिया। इस प्रकार आरोपी को कुल ₹1,44,200 का भुगतान करना होगा।
राशि नहीं चुकाने पर अतिरिक्त जेल
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी निर्धारित प्रतिकर राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
परिवादी की ओर से की गई पैरवी
मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता ए.के. भगत एवं शिवम गुप्ता ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए यह निर्णय पारित किया।
