13 घंटे तक दहशत का पर्याय बना रसल वाइपर, देहरी पर बैठा रहा मौत का पहरेदार; रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया

 

जबलपुर। भेड़ाघाट थाना क्षेत्र के दलपतपुर (लम्हेटा घाट रोड) स्थित एक मार्बल गोदाम में मंगलवार को करीब 13 घंटे तक एक खतरनाक रसल वाइपर सांप दहशत का कारण बना रहा। चार फीट लंबे इस विषैले सांप ने सुरक्षा कर्मी के घर की देहरी पर ऐसा डेरा डाला कि पूरा परिवार दिनभर घर में ही कैद होकर रह गया। देर शाम सर्प विशेषज्ञ की मदद से उसका सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया गया।

जानकारी के अनुसार, मार्बल गोदाम में सुरक्षा कर्मी गोलू सिंह राजपूत तड़के करीब 5 बजे लघुशंका के लिए घर से बाहर निकले। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, देहरी पर बैठा विशालकाय सांप प्रेशर कुकर जैसी तेज आवाज के साथ लगातार फुफकारने लगा। सांप का आक्रामक व्यवहार देखकर गोलू सिंह तुरंत पीछे हटे और जान बचाने के लिए घर का दरवाजा बंद कर लिया।

सुबह करीब 9 बजे सांप वहां से दिखाई नहीं दिया, जिससे परिवार ने राहत की सांस ली। लेकिन शाम करीब 5 बजे वही सांप फिर उसी स्थान पर लौट आया और शिकार करने की मुद्रा में बैठकर फुफकारने लगा। इसके बाद गोलू सिंह ने तुरंत प्रसिद्ध सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे को सूचना दी।

मौके पर पहुंचे गजेंद्र दुबे ने देखा कि सांप एक बड़े चूहे को धीरे-धीरे निगल रहा था। काफी सावधानी और सतर्कता के साथ उन्होंने विषैले सर्प का सफल रेस्क्यू किया और उसे सुरक्षित पकड़कर उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया।

भारत के सबसे खतरनाक सांपों में गिना जाता है रसल वाइपर

सर्प विशेषज्ञ गजेंद्र दुबे ने बताया कि पकड़ा गया सांप रसल वाइपर (Russell’s Viper) प्रजाति का था, जिसे मध्य भारत में पर्रान या दबोईया तथा महाराष्ट्र में घोणस के नाम से जाना जाता है। यह भारत के चार सबसे विषैले सांपों में से एक है और अत्यंत खतरनाक माना जाता है।

उन्होंने बताया कि रसल वाइपर के विष में हीमोटॉक्सिन (Hemotoxin) पाया जाता है, जो शरीर की रक्त कोशिकाओं, मांसपेशियों और किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यदि इस सांप के काटने के बाद तीन घंटे के भीतर पीड़ित को उचित चिकित्सा और एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध नहीं कराया गया तो स्थिति जानलेवा हो सकती है।

सर्प विशेषज्ञ ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी विषैला सांप दिखाई दे तो उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।

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