भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में वर्षों से खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भरने के लिए भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब तक लोक सेवा आयोग (PSC) के जरिए होने वाली भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाते हुए स्वास्थ्य विभाग को सीधे भर्ती का अधिकार दे दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी तेजी से दूर होगी, लेकिन इस फैसले ने कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। अब स्वास्थ्य विभाग हर महीने ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करेगा और उसी महीने इंटरव्यू लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति करेगा।
PSC की लंबी प्रक्रिया पर सरकार का ब्रेक
अब तक स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती केवल मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से होती थी। विज्ञापन, आवेदन, परीक्षा, साक्षात्कार और परिणाम की लंबी प्रक्रिया के कारण नियुक्तियों में कई-कई महीने, बल्कि कई बार वर्षों का समय लग जाता था।
इसका सीधा असर सरकारी अस्पतालों पर पड़ता था, जहां सैकड़ों विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली पड़े रहते थे। सबसे अधिक परेशानी जिला अस्पतालों और ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलती थी, जहां मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
सरकार ने अब इस पूरी प्रक्रिया को स्वास्थ्य विभाग के हाथ में सौंप दिया है, ताकि जरूरत के मुताबिक नियमित भर्ती की जा सके।
हर महीने भर्ती… लेकिन क्या पारदर्शिता भी बनी रहेगी?
नई व्यवस्था के तहत हर महीने ऑनलाइन आवेदन और इंटरव्यू होंगे। इससे डॉक्टरों को भर्ती के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि प्रशासनिक और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि जब भर्ती का अधिकार सीधे विभाग के पास होगा, तब चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी? क्या इसके लिए अलग निगरानी तंत्र बनेगा या नहीं, इस पर फिलहाल सरकार ने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
तीन साल तक पहली पोस्टिंग छोड़ने की अनुमति नहीं
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया आसान करने के साथ एक सख्त शर्त भी लागू की है।
चयनित विशेषज्ञ डॉक्टरों को पहली पदस्थापना पर कम से कम तीन वर्ष तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। अब तक बड़ी संख्या में डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में पदस्थापना की कोशिश करते थे, जिससे छोटे जिलों के अस्पताल विशेषज्ञ सेवाओं से वंचित रह जाते थे।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
यदि नई व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ सरकारी अस्पतालों और मरीजों को मिलेगा। वर्षों से खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भरने की प्रक्रिया तेज होगी और मरीजों को अपने जिले में ही बेहतर इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।
साथ ही युवा विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी सरकारी सेवा में आने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अब निगाहें अमल पर
कैबिनेट ने नीति को मंजूरी दे दी है, लेकिन असली परीक्षा अब उसके क्रियान्वयन की होगी। स्वास्थ्य विभाग कब से आवेदन शुरू करेगा, कितनी रिक्तियां निकालेगा और कितने समय में वास्तव में अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होगी—इस पर सबकी नजर रहेगी।
बड़े सवाल
- क्या PSC को हटाने से भर्ती प्रक्रिया वास्तव में तेज और पारदर्शी होगी?
- क्या हर महीने भर्ती की व्यवस्था समय पर लागू हो पाएगी?
- तीन साल की अनिवार्य सेवा से ग्रामीण अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर टिक पाएंगे?
- क्या वर्षों से खाली पड़े सभी पद अब तेजी से भर सकेंगे?
सरकार का यह फैसला प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू होती है।
