मझौली में ‘मूंग गोलमाल’ की री-लॉन्चिंग! पुराने दागी परिवार के नए वेयरहाउस को सौंप दिया उपार्जन केंद्र

सियाराम वेयरहाउस का घोटाला अभी सुलझा नहीं, और ‘पिताश्री’ पर मेहरबान हुआ प्रशासन; पाटन का केंद्र कटंगी शिफ्ट करने का क्या है खेल?

जबलपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन (खरीदी) शुरू होते ही भ्रष्टाचार और सिंडिकेट के पुराने खिलाड़ियों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन ने इस बार मूंग खरीदी के लिए जो 10 केंद्र बनाए हैं, उनमें से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले मझौली क्षेत्र में ‘घोटाले का पुराना पैटर्न’ दोहराने की पूरी तैयारी नजर आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि सब कुछ जानते हुए भी वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और जिम्मेदार अधिकारियों ने एक ऐसे वेयरहाउस को प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर रख दिया, जिसका पूरा कुनबा पहले से ही महाघोटाले के आरोपों से घिरा हुआ है।

पुराना ‘सियाराम’ विवादों में, तो ‘पिताश्री’ को बना दिया केंद्र
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2023 में मझौली के सियाराम वेयरहाउस में मूंग का एक बहुत बड़ा घोटाला उजागर हुआ था, जिसकी जांच आज भी कछुआ गति से चल रही है और पीड़ित किसान तीन साल से भुगतान के लिए भटक रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस घोटाले के मुख्य किरदार पवार परिवार के ही दूसरे गोदाम—पिताश्री वेयरहाउस—को इस साल दोबारा उपार्जन केंद्र की कमान सौंप दी गई है। कागजों पर भले ही लाइसेंस अलग-अलग नामों से हों, लेकिन विभाग के अफसर भी जानते हैं कि इन 4-5 वेयरहाउसों की रिमोट कंट्रोलिंग ‘अमित पवार’ नामक एक ही रसूखदार व्यक्ति के हाथ में है।

मूंग की ‘अदला-बदली’ की तगड़ी आशंका
इस फैसले के पीछे का खेल और भी गहरा है। वर्तमान में सियाराम वेयरहाउस में रखी पुरानी मूंग की ग्रेडिंग और फिल्टर का काम चल रहा है। वहीं, इसी परिवार के ‘माताश्री वेयरहाउस’ का उपयोग पहले भी मूंग डंपिंग और मिलावट के लिए सुर्खियां बटोर चुका है। जानकारों का कहना है कि नए केंद्र (पिताश्री) पर आने वाली नई और अच्छी मूंग को पुरानी और घटिया मूंग से रिप्लेस (अदला-बदली) करने का एक सुरक्षित कॉरिडोर तैयार कर दिया गया है।

ईमानदार वेयरहाउस खाली, दागी को तवज्जो क्यों?
बड़ा सवाल यह है कि पिताश्री वेयरहाउस के महज 5 किलोमीटर के दायरे में कई साफ-सुथरी छवि वाले वेयरहाउस खाली पड़े हैं। इस साल मूंग का पंजीयन और आवक दोनों कम है, जिसके लिए 1000 से 2000 मीट्रिक टन की छोटी क्षमता वाले गोदाम भी पर्याप्त थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने आख़िर किस ‘विशेष सेटिंग’ के तहत विवादित ग्रुप को ही केंद्र के लिए चुना?

पाटन के किसानों के साथ भद्दा मजाक: नाम पाटन का, केंद्र कटंगी में!
प्रशासनिक मनमानी का दूसरा अजीबोगरीब नमूना पाटन तहसील में देखने को मिला है। भौगोलिक स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए पाटन का उपार्जन केंद्र कटंगी क्षेत्र के रुद्रास वेयरहाउस में खोल दिया गया है और इसकी जिम्मेदारी ‘बोरिया समिति’ को दी गई है।प्रस्तावित सूची दरकिनार: सहकारिता विभाग ने जिला प्रशासन को 13 समितियों की जो सूची भेजी थी, उसमें पाटन में दो केंद्र प्रस्तावित थे।

पाटन के साथ सौतेला व्यवहार
प्रशासन ने मझौली, सिहोरा और शाहपुरा जैसे क्षेत्रों को दो-दो केंद्र बांट दिए, लेकिन पाटन जैसे विशाल कृषि बेल्ट को सिर्फ एक केंद्र दिया, और उसे भी उठाकर कटंगी (पाटन से दूर) फेंक दिया। इससे पाटन के किसानों को अपनी उपज कौड़ियों के दाम बिचौलियों को बेचने या भारी परिवहन खर्च उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

जांच के दायरे में आएंगे साहब?
जब 2023 के घोटाले की जांच लंबित है, तो उसी सिंडिकेट को दोबारा मौका किसके संरक्षण में मिला?पाटन का केंद्र कटंगी शिफ्ट करके क्या किसी चहेते वेयरहाउस संचालक को फायदा पहुंचाने की स्क्रिप्ट लिखी गई है?क्या जबलपुर कलेक्टर इस पूरे उपार्जन नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराकर किसानों के हक की रक्षा करेंगे?

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