अब अस्पतालों में नहीं चलेगी ‘फर्जी डिग्री’ की एंट्री! जबलपुर में निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर प्रशासन का बड़ा शिकंजा

पुलिस वेरिफिकेशन, चरित्र सत्यापन और डिग्री जांच के बिना नहीं होगी नियुक्ति, लापरवाही पर संस्थान होंगे जिम्मेदार

जबलपुर। क्या शहर के निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में अब तक बिना पर्याप्त सत्यापन के कर्मचारियों की नियुक्तियां होती रही हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए कड़े निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब किसी भी डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी की नियुक्ति बिना पुलिस सत्यापन, चरित्र सत्यापन और शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के नहीं की जा सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश को निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब हर नियुक्ति होगी जांच के दायरे में

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, निजी अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को नियुक्ति से पहले संबंधित कर्मचारी के सभी आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करना अनिवार्य होगा।

इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति का पंजीयन संबंधित वैधानिक परिषद—जैसे मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मेसी या आयुष परिषद—में वैध है या नहीं, इसकी भी पुष्टि करनी होगी।

मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत व्यक्ति की योग्यता और वैध पंजीयन सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। यदि बिना सत्यापन के किसी व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है, तो गलत उपचार, चिकित्सकीय लापरवाही और अन्य गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेजों की जांच करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रत्येक संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारी है।

अब जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे संचालक

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्वास्थ्य संस्थान द्वारा बिना आवश्यक सत्यापन या वैध पंजीयन के किसी व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है, तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित संस्थान स्वयं उत्तरदायी होगा और उसके विरुद्ध प्रचलित नियमों के अनुसार वैधानिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।

दस्तावेज भी रखने होंगे सुरक्षित

स्वास्थ्य विभाग ने सभी निजी संस्थानों को यह भी निर्देश दिया है कि भविष्य में होने वाली प्रत्येक नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उन्हें प्रस्तुत किया जा सके।

क्या बड़े स्तर पर होगा सत्यापन अभियान?

स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि—

  • क्या निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में कार्यरत सभी कर्मचारियों का सत्यापन कराया जाएगा?
  • क्या पुराने कर्मचारियों के दस्तावेजों की भी दोबारा जांच होगी?
  • क्या बिना वैध पंजीयन वाले लोगों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई शुरू होगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से स्पष्ट होंगे। फिलहाल प्रशासन का यह कदम निजी स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही बढ़ाने और मरीजों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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