राष्ट्रपति सम्मान पर बवाल: स्वर्ण पदकधारियों का विरोध, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
दीक्षांत समारोह से पहले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में हंगामा, राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाने पहुंचे छात्र हुए नाराज
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह से पहले एक बड़ा विवाद सामने आया है। राष्ट्रपति के हाथों स्वर्ण पदक और उपाधि प्राप्त करने का सपना लेकर देश-विदेश से जबलपुर पहुंचे 220 से अधिक स्वर्ण पदकधारी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। रिहर्सल के दौरान यह जानकारी मिलने के बाद कि मंच पर केवल 20 चयनित विद्यार्थियों को ही राष्ट्रपति के कर-कमलों से स्वर्ण पदक एवं उपाधि प्रदान की जाएगी, छात्रों में असंतोष फैल गया।
जानकारी के अनुसार दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में स्वर्ण पदकधारी और शोधार्थी कई दिनों पहले ही जबलपुर पहुंच चुके हैं। अधिकांश विद्यार्थियों और उनके परिजनों की अपेक्षा थी कि उन्हें राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। लेकिन रिहर्सल के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यह बताया गया कि समयाभाव और कार्यक्रम की निर्धारित रूपरेखा के कारण केवल 20 विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया जाएगा, जबकि अन्य विद्यार्थियों को अलग प्रक्रिया के माध्यम से पदक और उपाधियां प्रदान की जाएंगी।
इस घोषणा के बाद प्रेक्षागृह में मौजूद विद्यार्थियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। छात्रों का कहना था कि जब सभी स्वर्ण पदकधारी अपनी-अपनी श्रेणियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ा रहे हैं, तो फिर केवल कुछ विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया है। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि 20 विद्यार्थियों का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया।
नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद बड़ी संख्या में स्वर्ण पदकधारी कुलगुरु कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर मांग की कि सभी पदकधारियों को समान अवसर दिया जाए अथवा चयन की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।
विद्यार्थियों का कहना है कि वे देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से लंबी दूरी तय कर इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने आए हैं। ऐसे में केवल चुनिंदा विद्यार्थियों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित करने का निर्णय अन्य छात्रों के साथ अन्याय है। उनका तर्क है कि सभी स्वर्ण पदकधारी समान उपलब्धि के आधार पर सम्मान के पात्र हैं और उनके बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मामले को शांत कराने का प्रयास किया गया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह की निर्धारित समय-सीमा और प्रोटोकॉल के कारण सीमित संख्या में विद्यार्थियों को मंच पर सम्मानित करने की व्यवस्था बनाई गई है। हालांकि छात्रों ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और चयन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं।
दीक्षांत समारोह में देश की राष्ट्रपति की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा और प्रोटोकॉल की दृष्टि से भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। ऐसे में समारोह से ठीक पहले छात्रों के विरोध ने विश्वविद्यालय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की नाराजगी दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और समारोह के दिन स्थिति किस प्रकार रहती है।
