JABALPUR NEWS-अतिक्रमण विभाग पर रिश्वतखोरी: “42 हजार गए, अतिक्रमण जस का तस! अब CCTV से खुलेगा राज?”

अतिक्रमण प्रभारी पर महिला का बड़ा आरोप
जबलपुर। नगर निगम के अतिक्रमण विभाग पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे। अब एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता को भी कठघरे में ला दिया है। आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक महिला से हजारों रुपए लिए गए, लेकिन न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही पैसे लौटाए गए।

मामला निवाड़गंज स्थित पुराने चुंगी दफ्तर के पास दुकान संचालित करने वाली 65 वर्षीय सरिता राठौर और उनकी पुत्री यामिनी राठौर से जुड़ा है। दोनों ने नगर निगम आयुक्त को दिए गए शिकायती आवेदन में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी दुकान के सामने लंबे समय से अतिक्रमण है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कई बार नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

आरोप है कि इसी दौरान अतिक्रमण दल के प्रभारी जय प्रवीण ने कार्रवाई कराने के एवज में पहले 50 हजार रुपए की मांग की। बाद में कथित तौर पर 42 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। शिकायतकर्ताओं के अनुसार यह रकम दो किश्तों में दी गई। पहली किश्त 20 हजार रुपए सिविक सेंटर स्थित एक चाय दुकान के पास और दूसरी किश्त 22 हजार रुपए नगर निगम अतिक्रमण शाखा के गेट के बाहर दी गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रकम ली गई थी तो उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड क्यों नहीं है? शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पैसे लेने के बाद रसीद देने का आश्वासन दिया गया, लेकिन न तो रसीद दी गई और न ही कथित अतिक्रमण हटाया गया। आरोप यह भी है कि बाद में रसीद मांगने पर टालमटोल शुरू हो गई।

शिकायत में एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है। राठौर परिवार का कहना है कि उन्हें बताया गया कि “ऊपर तक पैसे पहुंचाने पड़ते हैं, तभी काम होता है।” आवेदन में यह भी उल्लेख है कि कथित रूप से अन्य अधिकारियों का नाम लेकर भी रकम की जरूरत बताई गई।

क्या CCTV खोलेगा पूरा राज?

इस मामले का सबसे अहम पहलू सीसीटीवी फुटेज को माना जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने अपने आवेदन में स्पष्ट लिखा है कि जिन स्थानों पर पैसे दिए गए, वहां आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित तारीख और समय की फुटेज की जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि वहां कौन मौजूद था, किससे मुलाकात हुई और क्या लेन-देन हुआ। यही वजह है कि अब मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। यदि जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और शिकायतकर्ताओं के दावों का तकनीकी सत्यापन करती हैं तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

अब निगाहें निगम प्रशासन पर

नगर निगम में अतिक्रमण कार्रवाई को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगते रहे हैं कि कहीं कार्रवाई होती है तो कहीं शिकायतों के बावजूद वर्षों तक अतिक्रमण जस का तस बना रहता है। ऐसे में यह नया मामला विभाग की कार्यप्रणाली पर और गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन इतना तय है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग उठेगी।

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