बिना इंटरव्यू, बिना चयन समिति और नियमों से अधिक भर्ती करने की शिकायत, 7 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
जबलपुर। जिले के स्वास्थ्य विभाग में संविदा भर्ती को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सीएमएचओ द्वारा जारी पत्र में तीन वरिष्ठ अधिकारियों को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए सात दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीएमओ पाटन के अंतर्गत नर्सिंग होम शाखा के नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श बिश्नोई द्वारा जी-आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में मनमानी की गई। आरोप है कि कई कर्मचारियों की नियुक्ति बिना इंटरव्यू, बिना चयन समिति की अनुशंसा और निर्धारित नियमों का पालन किए बिना कर दी गई। इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया है कि कलेक्टर द्वारा स्वीकृत संख्या से अधिक कर्मचारियों की भर्ती भी की गई।
सीएमएचओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस मामले की जांच के लिए डॉ. विनीता उप्पल (डीएचओ-3), डॉ. एस.एस. दहिया (शिशु रोग विशेषज्ञ) और डॉ. विनोद गुप्ता (जिला टीकाकरण अधिकारी) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। शिकायत की प्रति भी जांच अधिकारियों को भेजते हुए निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी तथ्यों की जांच कर सात दिनों के भीतर स्पष्ट अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।
शिकायत में क्या लगाए गए हैं आरोप?
शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा ने 18 जून 2026 को सीएमएचओ को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। आवेदन के अनुसार चयन प्रक्रिया में निर्धारित नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से नियुक्तियां की गईं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा पात्र एवं मेरिटधारी अभ्यर्थियों के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता को भी भेजी गई प्रतिलिपि
सीएमएचओ कार्यालय ने जांच आदेश की प्रतिलिपि शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा को भी सूचनार्थ भेजी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए औपचारिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
स्वास्थ्य विभाग में संविदा भर्ती को लेकर उठे इस विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ विवादित नियुक्तियों पर भी असर पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें सात दिन में आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
