हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं”—वेतन मांगने पर अधिकारी के कथित जवाब से भड़के कर्मचारी: शहपुरा बीईओ कार्यालय में वेतन विवाद

शहपुरा (भिटौनी)। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय शहपुरा में पदस्थ एक कर्मचारी का वेतन रोके जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जनगणना और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों में लगातार ड्यूटी करने वाले कर्मचारी भूपेंद्र गढ़वाल को वेतन नहीं मिलने से कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने इस मामले को कर्मचारी उत्पीड़न का उदाहरण बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

जानकारी के अनुसार बीईओ कार्यालय शहपुरा में पदस्थ भूपेंद्र गढ़वाल पिछले वर्ष नवंबर माह से शुरू हुए एसआईआर कार्य में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही वर्तमान में वे जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत कंट्रोल रूम में ड्यूटी कर रहे हैं। बताया जाता है कि विभाग द्वारा उन्हें अभी तक मूल पदस्थापना स्थान से विधिवत रिलीव भी नहीं किया गया है, इसके बावजूद वे लगातार शासकीय कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं।

आदेशों का पालन किया, फिर भी रोक दिया वेतन

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि विभागीय आदेशों के तहत विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों में ड्यूटी करने के बावजूद भूपेंद्र गढ़वाल का वेतन रोक दिया गया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि एसआईआर कार्य के दौरान भी कई बार उनका वेतन समय पर जारी नहीं किया गया और उन्हें बार-बार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ओर शासन कर्मचारियों से पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की अपेक्षा करता है, वहीं दूसरी ओर आदेशों का पालन करने वाले कर्मचारियों को ही प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। उनका आरोप है कि वेतन संबंधी जानकारी लेने पर कर्मचारी को संतोषजनक जवाब तक नहीं दिया जाता।

“हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं” जैसे जवाब मिलने का आरोप

कर्मचारी संघ के अनुसार जब भूपेंद्र गढ़वाल ने अपने रुके हुए वेतन के संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि “हम तुम्हारे नौकर नहीं हैं, अपना वेतन स्वयं बनाओ और लगाओ।” संघ का कहना है कि इस तरह का व्यवहार न केवल अमर्यादित है बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और मनोबल को भी ठेस पहुंचाने वाला है।

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि एक छोटे कर्मचारी से स्वयं वेतन प्रक्रिया पूरी करने की अपेक्षा करना विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यदि कर्मचारी दिन-रात शासकीय कार्यों में लगा हुआ है तो उसके वेतन संबंधी दायित्वों का निर्वहन विभागीय अधिकारियों को करना चाहिए।

आर्थिक संकट से जूझ रहा कर्मचारी

वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारी और उसका परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में नियमित वेतन ही कर्मचारियों के परिवार का मुख्य सहारा होता है। ऐसे में बिना किसी ठोस कारण के वेतन रोकना अन्यायपूर्ण और संवेदनहीन कदम माना जाना चाहिए।

संघ का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के कार्य को लेकर कोई आपत्ति है तो उसके लिए विभागीय प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, लेकिन वेतन रोककर दंडित करना उचित नहीं है।

कर्मचारी संघ ने प्रशासन को दी चेतावनी

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के नेताओं अतुल मिश्रा, रत्नेश मिश्रा, नितिन अग्रवाल, दुर्गेश पांडेय, प्रमोद वर्मा, हरीश सिंह और माधव पांडेय सहित अन्य पदाधिकारियों ने मांग की है कि भूपेंद्र गढ़वाल का लंबित वेतन तत्काल जारी किया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए संगठन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक कदम उठाने को मजबूर होगा। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं है, बल्कि उन सभी कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों का प्रश्न है जो पूरी निष्ठा के साथ शासन के महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।

विभाग का पक्ष आना बाकी

फिलहाल इस पूरे मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। हालांकि कर्मचारी संगठनों की सक्रियता के बाद यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

Share This Article
Translate »