तिलवारा थाने के एसआई का रसूख देखों, तबादला आदेश थाने ही नहीं पहुंचने दिया

जबलपुर। पुलिस विभाग में अनुशासन और आदेशों के तत्काल पालन की बात तो खूब की जाती है, लेकिन तिलवारा थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक अभिषेक कैथवास का मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। करीब पांच माह पहले उनका तबादला संजीवनी नगर थाने किया गया था, लेकिन आदेश जारी होने के बावजूद वे अब तक तिलवारा थाने से रिलीव नहीं हुए। विभागीय व्यवस्था में यह देरी महज प्रशासनिक चूक है या किसी प्रभाव का परिणाम, इसे लेकर पुलिस महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि स्थानांतरण आदेश की प्रतियां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, संबंधित अधिकारियों, विभिन्न थानों और स्टेनो शाखा तक पहुंचीं, लेकिन तिलवारा थाने में आदेश की विधिवत तामील को लेकर स्थिति आज भी स्पष्ट नहीं है। यदि यह दावा सही है तो सवाल यह है कि जिस थाने से अधिकारी को रिलीव किया जाना था, वहीं आदेश क्यों नहीं पहुंचा?

यह आदेश है जो तिलवारा थाना ही नहीं पहुचा
यह आदेश है जो तिलवारा थाना ही नहीं पहुचा

पांच महीने से आदेश बेअसर

जानकारी के अनुसार, एसआई अभिषेक कैथवास का स्थानांतरण करीब पांच माह पहले संजीवनी नगर थाने के लिए किया गया था। सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया में तबादला आदेश जारी होने के बाद संबंधित अधिकारी को पुराने पदस्थापना स्थल से रिलीव कर नई जगह कार्यभार ग्रहण कराया जाता है।

लेकिन इस मामले में आदेश जारी होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी रही। एसआई कैथवास तिलवारा थाने में ही सेवाएं दे रहे हैं, जबकि संजीवनी नगर थाने में उनकी पदस्थापना कागजों तक सीमित बताई जा रही है।

तिलवारा थाने तक आदेश क्यों नहीं पहुंचा?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आदेश की तामील से जुड़ा है। सूत्रों का दावा है कि आदेश की जानकारी पुलिस विभाग के कई कार्यालयों और इकाइयों तक पहुंची, लेकिन तिलवारा थाने में इसकी औपचारिक प्राप्ति दर्ज नहीं हुई।

यदि आदेश वास्तव में जारी हुआ था, तो उसकी प्रति संबंधित थाना प्रभारी तक पहुंचाना किसकी जिम्मेदारी थी? क्या डाक या कार्यालयी प्रक्रिया में चूक हुई? क्या किसी स्तर पर आदेश को दबाया गया? या बाद में कोई मौखिक अथवा लिखित निर्देश देकर रिलीविंग रोकी गई? इन सवालों पर विभागीय स्तर से अब तक कोई स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

क्या तबादला आदेश केवल कागजी कार्रवाई था?

तबादला आदेश जारी होने के बाद भी अधिकारी का पुराने थाने में बने रहना पुलिस विभाग की स्थानांतरण व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि किसी अधिकारी की सेवाएं पुराने थाने में आवश्यक थीं तो क्या सक्षम अधिकारी ने उन्हें रोकने का लिखित आदेश जारी किया? यदि ऐसा कोई आदेश है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

और यदि कोई रोक आदेश नहीं है तो पांच माह बाद भी रिलीविंग न होना प्रशासनिक अनुशासन की गंभीर अनदेखी माना जा सकता है।

संजीवनी नगर में पदस्थापना का इंतजार

दूसरी ओर, संजीवनी नगर थाना एसआई कैथवास की नवीन पदस्थापना का स्थान बताया गया है। लेकिन पांच माह बाद भी उनके वहां कार्यभार ग्रहण नहीं करने से यह सवाल उठ रहा है कि वहां की आवश्यकता और रिक्ति का क्या हुआ।

यदि पुलिस मुख्यालय या जिला स्तर पर किसी अधिकारी को एक थाने से दूसरे थाने भेजने का निर्णय लिया गया था, तो उसका उद्देश्य तभी पूरा होता जब आदेश का पालन भी कराया जाता। आदेश जारी कर उसे अमल में न लाना पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को कमजोर करता है।

किसके स्तर पर रुकी रिलीविंग?

मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए यह जानना जरूरी है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद उसकी फाइल किन-किन अधिकारियों और शाखाओं से होकर गुजरी। आदेश की प्रति किस दिन तैयार हुई, किन कार्यालयों को भेजी गई और तिलवारा थाने को भेजे जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है।

यदि आदेश तिलवारा थाने भेजा गया था तो उसकी प्राप्ति किसने की? यदि नहीं भेजा गया तो इसके पीछे कारण क्या था? क्या यह सामान्य लापरवाही थी या जानबूझकर की गई देरी? इसका उत्तर विभागीय रिकॉर्ड की जांच से ही सामने आ सकता है।

रसूख की चर्चा क्यों?

पुलिस महकमे में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक तबका इसे प्रशासनिक ढिलाई बता रहा है, जबकि कुछ लोग इसे अधिकारी के प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन पांच माह तक आदेश का प्रभावी न होना इन चर्चाओं को बल जरूर देता है।

यदि अधिकारी को सक्षम स्तर से पुराने थाने में बनाए रखने की अनुमति दी गई है तो विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। चुप्पी ही संदेह को और गहरा कर रही है।

जांच हुई तो खुलेंगे कई राज

इस मामले की निष्पक्ष जांच में तबादला आदेश, वितरण सूची, डिस्पैच रजिस्टर, प्राप्ति रजिस्टर, रिलीविंग आदेश और संबंधित अधिकारियों की टिप्पणियां महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। इन्हीं दस्तावेजों से साफ होगा कि आदेश कहां अटका और पांच माह तक उसका पालन क्यों नहीं हुआ।

पुलिस विभाग को यह भी स्पष्ट करना होगा कि एसआई अभिषेक कैथवास वर्तमान में तिलवारा थाने में किस लिखित आदेश के तहत कार्यरत हैं। यदि कोई संशोधित या स्थगन आदेश जारी हुआ है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए।

फिलहाल पूरा मामला पुलिस विभाग की आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था और तबादला आदेशों की गंभीरता पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि विभाग मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या फिर तबादले का यह आदेश भी फाइलों में दबा रह जाता है।

Share This Article
Translate »