बिजली कंपनी में ‘मीटर कांड’ का खुलासा! बिना शुल्क जमा कराए लगाए जा रहे थे कनेक्शन, अपने ही कर्मचारियों पर एफआईआर
तीन आउटसोर्स कर्मचारी बर्खास्त, लाइन कर्मचारी और जेई निलंबित; विभाग बोला- अब कोई नहीं बचेगा
जबलपुर। बिजली कंपनी में मीटर लगाने के नाम पर चल रहे कथित खेल की परतें अब खुलने लगी हैं। विभागीय जांच में ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने बिजली वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विभाग के ही कुछ कर्मचारी बिना कनेक्शन शुल्क जमा कराए और बिना वैधानिक अनुमति के उपभोक्ताओं के घरों में बिजली मीटर लगा रहे थे। इस पूरे खेल से कंपनी को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
मामले को गंभीर मानते हुए बिजली कंपनी ने अपने ही तीन आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ रांझी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, लापरवाही और संभावित मिलीभगत के आरोप में एक लाइन कर्मचारी और एक कनिष्ठ अभियंता (जेई) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जांच में खुला ‘मीटर का खेल’
सूत्रों के अनुसार, अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा के निर्देश पर रांझी जोन में मीटर स्थापना और कनेक्शन प्रक्रिया की विशेष जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि आउटसोर्स कर्मचारी राहुल पटेल, अमर लोधी और दीपक अहिरवार विभाग की निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर कार्यालय से मीटर निकाल रहे थे और बिना निर्धारित शुल्क जमा कराए उपभोक्ताओं के यहां स्थापित कर रहे थे।
प्राथमिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद तीनों कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर उनके विरुद्ध रांझी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
पहले बाहरी लोग, अब अपने कर्मचारी घेरे में
करीब एक माह पहले भी बिजली कंपनी ने अवैध तरीके से मीटर बदलने के आरोप में दो बाहरी व्यक्तियों दिलीप कोष्ठा और कुतुबुद्दीन के खिलाफ माढ़ोताल और अधारताल थानों में प्रकरण दर्ज कराया था। उस समय विभाग ने संकेत दिए थे कि यदि जांच में कोई कर्मचारी शामिल पाया गया तो उसके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई होगी। ताजा कार्रवाई उसी जांच की अगली कड़ी मानी जा रही है।
17 मीटर रीडरों का तबादला, अधिकारियों पर भी गिरी गाज
मामले के बाद विभाग ने व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 17 मीटर रीडरों का तबादला कर दिया है। इसके अलावा लाइन कर्मचारी भगवान सिंह और कनिष्ठ अभियंता संजीत यादव को प्रथम दृष्टया लापरवाही और संदिग्ध भूमिका के चलते निलंबित कर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और यदि किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विभाग के भीतर कितना बड़ा है नेटवर्क?
इस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बिना शुल्क जमा कराए मीटर लगाए जा रहे थे, तो कार्यालय से मीटर बाहर कैसे निकले? रिकॉर्ड में इनका हिसाब-किताब कैसे नहीं दिखा? क्या यह केवल तीन कर्मचारियों का मामला है या इसके पीछे विभाग के भीतर कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी विभाग से सामग्री का बिना रिकॉर्ड बाहर जाना केवल निचले स्तर की चूक नहीं हो सकती। ऐसे मामलों में पूरी जवाबदेही तय किए बिना भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक संभव नहीं है।
पारदर्शिता बहाल करने का दावा
बिजली कंपनी ने सभी जोन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मीटर जारी करने, लगाने और बदलने की प्रत्येक प्रक्रिया का नियमित सत्यापन किया जाए। विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल दोषियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि राजस्व नुकसान रोकना और बिजली वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल करना भी है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल आउटसोर्स कर्मचारियों तक सीमित रहती है या इस पूरे कथित ‘मीटर कांड’ के पीछे मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचती है।
