पति-पत्नी नीति पर नया पेंच, मैरिज सर्टिफिकेट नहीं तो ट्रांसफर नहीं!:शादी के 20 साल बाद शिक्षक ढूंढ रहे मैरिज सर्टिफिकेट

भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुंच चुकी है, लेकिन जिन शिक्षकों को इस प्रक्रिया से राहत और परिवार के करीब पहुंचने की उम्मीद थी, उनके लिए यह व्यवस्था नई परेशानी का कारण बन गई है। विभाग का ट्रांसफर पोर्टल इन दिनों तकनीकी खामियों, दस्तावेजों की अनिवार्यता और आवेदन संबंधी बाधाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। सबसे बड़ा विवाद पति-पत्नी नीति के तहत स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों से विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र (मैरिज सर्टिफिकेट) अनिवार्य रूप से मांगे जाने को लेकर खड़ा हो गया है।

20 साल पुरानी शादी, लेकिन आज चाहिए प्रमाण!

खोजबीन में सामने आया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिनकी शादी 15 से 20 वर्ष पहले हुई थी। उस समय विवाह पंजीयन आम प्रचलन में नहीं था और न ही अधिकांश मामलों में इसे अनिवार्य माना जाता था। अब विभागीय पोर्टल पर मैरिज सर्टिफिकेट के बिना आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप हजारों शिक्षक, जो पति-पत्नी नीति का लाभ लेकर अपने परिवार के निकट पदस्थ होना चाहते हैं, आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं।

शिक्षकों का सवाल है कि जब वर्षों से विभाग उनकी सेवा पुस्तिका, पारिवारिक विवरण और अन्य शासकीय अभिलेखों को मान्यता देता रहा है, तो अचानक विवाह प्रमाण पत्र को ही एकमात्र आधार क्यों बनाया गया है?

सरकारी रिकॉर्ड मौजूद, फिर भी नहीं मान रहा पोर्टल

शासकीय शिक्षक संगठन का दावा है कि अधिकांश शिक्षकों की सेवा पुस्तिका, समग्र आईडी, पारिवारिक नामांकन रिकॉर्ड और अन्य शासकीय दस्तावेजों में पति-पत्नी संबंध स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। ये दस्तावेज वर्षों से शासन द्वारा प्रमाणिक माने जाते रहे हैं। इसके बावजूद ट्रांसफर पोर्टल केवल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र स्वीकार कर रहा है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में किसी कर्मचारी का वैवाहिक विवरण पहले से दर्ज है, तो क्या केवल एक दस्तावेज की अनुपलब्धता के कारण उसे स्थानांतरण के अधिकार से वंचित किया जा सकता है?

पोर्टल की तकनीकी खामियां बनी नई बाधा

जांच में यह भी सामने आया है कि विवाद केवल मैरिज सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर से कई अन्य तकनीकी समस्याओं की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।

  • दिव्यांगता प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो पा रहा।
  • म्यूचुअल ट्रांसफर (पारस्परिक स्थानांतरण) का विकल्प कई मामलों में खुल ही नहीं रहा।
  • जिला चयन के विकल्प दिखाई नहीं दे रहे हैं।
  • विभिन्न पदों और संवर्गों से जुड़े आवेदन तकनीकी त्रुटियों के कारण सबमिट नहीं हो पा रहे।
  • कई शिक्षकों को बार-बार लॉगिन और डेटा अपडेट की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

इन खामियों के कारण अंतिम समय में बड़ी संख्या में आवेदन अटके हुए बताए जा रहे हैं।

क्या समय सीमा खत्म होने से पहले सुधरेगी व्यवस्था?

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि तकनीकी और दस्तावेज संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो हजारों पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।

संगठन ने मांग की है कि—

  • मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए।
  • सेवा पुस्तिका, समग्र आईडी और अन्य शासकीय दस्तावेजों को वैकल्पिक प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
  • पोर्टल की तकनीकी कमियों को तत्काल दूर किया जाए।
  • आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए ताकि कोई भी पात्र शिक्षक तकनीकी कारणों से वंचित न रह जाए।

बड़ा सवाल

सरकार शिक्षकों को पारदर्शी और ऑनलाइन स्थानांतरण व्यवस्था देने का दावा कर रही है, लेकिन यदि पोर्टल ही आवेदन स्वीकार न करे और वर्षों पुराने कर्मचारियों से ऐसे दस्तावेज मांगे जाएं जो उनके पास उपलब्ध ही नहीं हैं, तो क्या यह व्यवस्था सुविधा से ज्यादा परेशानी का कारण नहीं बन रही?

फिलहाल हजारों शिक्षक विभाग की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमों और तकनीकी व्यवस्था में राहत देता है या नहीं।

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