कागजों में सैकड़ो और मैदान में काम।कर रहे सिर्फ 50 कर्मचारी ! अल्ट्रा क्लीन कंपनी की सूची से मचा हड़कंप

 

-कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जीएम विकास रजक के कारनामों की फिर खुली पोल

-काम करना तो दूर इन नाम के लोगों को जानते तक नहीं हैं कर्मचारी
– सूची ने खड़े किए कई सवाल, जांच हो तो भ्रष्टाचार से उठ जाएगा पर्दा

जबलपुर। नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स कंपनी अल्ट्रा क्लीन एक बार फिर विवादों में है। इस बार विवाद की वजह बनी है एक कथित सूची, जिसमें अतिक्रमण विभाग में कार्यरत लगभग 100 कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं इस सूची ने नगर निगम के गलियारों में फिर हड़कंप मचा दिया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, विभाग में कार्यरत कई कर्मचारियों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर दावा किया है कि सूची में दर्ज करीब 50 कर्मचारी ऐसे हैं जो फर्जी अटेंडेंस लगा रहे हैं और उनके नाम से कंपनी पूरा वेतन निकाल कर डकार रही है। ये उन कर्मचारियों के नाम हैं जिन्हें कभी फील्ड में काम करते नहीं देखा गया। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि वे इस नाम के लोगों को जानते तक नहीं हैं काम करना तो बहुत दूर की बात है । यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठता है कि सूची में दर्ज इन कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती कहां है और उनके कार्य का रिकॉर्ड क्या है?
इसी कथित सूची के सामने आने के बाद नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि सूची में दर्ज प्रत्येक कर्मचारी का उपस्थिति रिकॉर्ड, कार्यस्थल, वेतन भुगतान और तैनाती का विवरण सार्वजनिक किया जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
इस बीच, अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर पहले से उठ रही शिकायतों के कारण भी यह मामला चर्चा में है। कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका को लेकर शिकायतकर्ताओं द्वारा पहले भी आरोप लगाए जाते रहे हैं। संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं। यदि सूची सही है, तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि सूची गलत या भ्रामक है, तो प्रशासन को भी इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण देना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या नगर निगम इस कथित सूची की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा, या फिर यह मामला भी केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा?

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