मानवाधिकार आयोग के बाद अब ईपीएफओ ने अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर कसा शिकंजा, डायरेक्टर मुकेश कालवे और जीएम विकास रजक से जुड़ी शिकायत की जांच के दिए आदेश

-अब कर्मचारियों को हक मिलने की जगी उम्मीद
-भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने जबलपुर कार्यालय को भेजा पत्र
-कर्मचारियों के ईपीएफ के लाखों रूपए डकारने का मामला
जबलपुर। नगर निगम में भ्रष्टाचार के लिए बदनाम हो चुकी आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर अब एक के बाद एक विभागों ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब कंपनी ईपीएफओ की जांच के दायरे में आ गई है। सैंकड़ों कर्मचारियों की भविष्य निधि के लाखों रूपए डकारने के आरोप को लेकर की गई शिकायत पर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ ) ने कार्रवाई प्रारंभ कर दी है। क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता धर्मराज सिंह की शिकायत को आवश्यक जांच एवं नियमानुसार कार्रवाई के लिए ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय, जबलपुर को भेज दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत में कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक पर कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान, वेतन भुगतान और श्रम कानूनों के कथित उल्लंघन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के आधार पर अब संबंधित अभिलेखों एवं तथ्यों की जांच की जाएगी। ईपीएफओ भोपाल द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मामला क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए शिकायत का परीक्षण कर आवश्यक जांच की जाएगी तथा जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कर्मचारी भविष्य निधि एवं अन्य लागू कानूनों के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि नगर निगम जबलपुर के स्वास्थ्य विभाग, अतिक्रमण शाखा एवं उद्यान विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा लंबे समय से ईपीएफ कटौती, वेतन भुगतान तथा श्रमिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच होती है तो लंबे समय से लंबित उनकी शिकायतों का समाधान संभव हो सकेगा और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम को नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें ईपीएफओ जबलपुर की जांच पर टिकी हैं, वही अल्ट्रा क्लीन कंपनी में आउटसोर्स के माध्यम से लगे हुए कर्मचारियों को अब उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है उनका कहना है कि अगर जांच सही से हुई तो उन्हें उनका हक जरूर मिलेगा और इसमें जो भी दोषी है उनको बख्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने उन्हें वेतन के नाम पर परेशान किया है और कई महीनों तक उनका वेतन को रोककर भी रखा था।

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