पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी के फैसले से 1200 बच्चों का भविष्य कैद? स्कूल पर चार महीने से ताला

जबलपुर। पनागर क्षेत्र स्थित संदीपनी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिंगोद का मामला अब केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है। करीब 1200 विद्यार्थियों के भविष्य पर ताला लटकने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी ने अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों का आक्रोश चरम पर पहुंचा दिया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में अभिभावक और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी, प्राचार्य रत्नेश कुमार शर्मा तथा सहायक प्राचार्य अशोक शर्मा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत सौंप दी।

साथ ही जिला कलेक्टर को भी पुनः आवेदन देकर आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक आदेशों की लगातार अनदेखी की जा रही है और बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ हो रहा है।

चार महीने से बंद स्कूल, बच्चों की पढ़ाई ठप

शिकायत के अनुसार, सिंगोद स्थित संदीपनी स्कूल में नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक करीब 1200 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। लेकिन विद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया गया और तब से स्कूल बंद पड़ा है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी विद्यालय नहीं खुलने से छात्र-छात्राएं भटकने को मजबूर हैं।

ज्ञापन पर ज्ञापन, लेकिन नहीं खुला ताला

अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय खुलवाने के लिए लगातार प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई गई।

  • 23 मार्च 2026 को जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।
  • 1 अप्रैल को विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया।
  • 23 अप्रैल को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के नेतृत्व में पनागर बंद कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
  • मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद भी जनसुनवाई में मामला दर्ज हुआ और निराकरण के निर्देश जारी किए गए।
  • 23 जून को भी संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन आज तक विद्यालय नहीं खुला।

अभिभावकों का आरोप है कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।

कलेक्टर के आदेश भी नहीं माने?

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी के कार्यकाल में शुरू हुई इस पूरी प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आज भी छात्र भुगत रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जिला कलेक्टर के आदेशों के बाद भी स्कूल नहीं खुला, तो यह केवल प्रशासनिक उदासीनता नहीं बल्कि आदेशों की खुली अवहेलना है।

सांसद-विधायक तक पहुंचे, फिर भी समाधान नहीं

अभिभावकों का दावा है कि इस गंभीर समस्या से सांसद, विधायक, जिला पंचायत सदस्य और जनपद सदस्यों को भी अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद स्कूल का ताला नहीं खुला। इससे क्षेत्र के लोगों में सरकार और शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

SP कार्यालय पहुंचे अभिभावक, दोषियों पर एफआईआर की मांग

मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचे अभिभावकों और क्षेत्रीय नागरिकों ने पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी, प्राचार्य रत्नेश कुमार शर्मा और सहायक प्राचार्य अशोक शर्मा के विरुद्ध विधि अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।

शिकायत के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ने मामले को गंभीर बताते हुए आश्वासन दिया कि यदि एक सप्ताह के भीतर विद्यालय शुरू नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने शिकायतकर्ताओं से अगले मंगलवार को पुनः मिलने को भी कहा।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी

जनसुनवाई में राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष छोटे भाई कुर्मी, इंजी. प्रवीण गजभिये “दादा”, ओमप्रकाश कुर्मी, राजेश्वरी पटेल, मिथिला पटेल, रंजीत दाहिया, रीना पटेल, पूजा, रंजना, प्रीति कोल, ज्योति, अंगूरी गौड़, सरोज चक्रवर्ती, पूजा चौधरी, यूनिस अली, पुरुषोत्तम चौधरी, अशोक दाहिया, रामराज पटेल, रमन पटेल, बंशी भाई कुर्मी, एडवोकेट विनय भगत, एडवोकेट परमानंद साहू, एडवोकेट रवि भगत सहित बड़ी संख्या में अभिभावक और क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।

 

Share This Article
Translate »