मप्र में खत्म होगा दो बच्चों का नियम? 25 साल पुरानी नीति पर पुनर्विचार, जनता की राय के बाद होगा फैसला

भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों और पदोन्नति से जुड़ा दो बच्चों का नियम अब बदलाव के दौर से गुजर सकता है। राज्य सरकार करीब 25 वर्ष पुरानी इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माने जाते हैं। नए सेवा भर्ती नियमों के मसौदे में इस प्रावधान को हटाने पर विचार किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, 26 मई को भोपाल में मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक का उद्देश्य राज्य के नए सेवा भर्ती नियमों को अंतिम रूप देना था, लेकिन दो बच्चों की शर्त हटाने के प्रस्ताव पर अधिकारियों के बीच मतभेद सामने आ गए।

अधिकारियों ने जताई आपत्ति

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारियों ने तर्क दिया कि यह नियम जनसंख्या नियंत्रण की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उनका कहना था कि सरकारी नौकरी और पदोन्नति से जुड़े इस प्रावधान ने लोगों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया है। ऐसे में नियम समाप्त होने से इसका सकारात्मक प्रभाव कमजोर पड़ सकता है।

जनसंख्या संतुलन को लेकर भी हुई चर्चा

चर्चा के दौरान जनसंख्या वृद्धि और सामाजिक संतुलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विचार किया गया। अधिकारियों का मानना था कि किसी भी निर्णय से पहले इसके दूरगामी प्रभावों का आकलन जरूरी है। इसी कारण बैठक में कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

अब जनता की राय के बाद फैसला

सरकार ने तय किया है कि नए भर्ती नियमों का प्रारूप तैयार कर उसे सार्वजनिक किया जाएगा। आम नागरिकों, संगठनों और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।

2001 में लागू हुआ था नियम

मध्यप्रदेश में दो बच्चों की शर्त 26 जनवरी 2001 को लागू की गई थी। इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था। पिछले 25 वर्षों में इस नियम के कारण हजारों अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों और पदोन्नति से वंचित हुए। कई मामलों में कर्मचारियों के प्रमोशन और वेतनवृद्धि भी प्रभावित हुई।

सुप्रीम कोर्ट दे चुका है वैधता

सुप्रीम कोर्ट भी इस तरह के प्रावधान को संवैधानिक और तर्कसंगत मान चुका है। वर्ष 2003 के एक महत्वपूर्ण फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से ऐसी शर्तें लगाना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है। हालांकि, राज्य सरकार चाहे तो नीतिगत स्तर पर इसमें बदलाव कर सकती है।

लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें फैसले पर

यदि राज्य सरकार दो बच्चों की शर्त समाप्त करती है तो तीन या अधिक संतान वाले हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा के अवसर खुल सकते हैं। वहीं, जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञ इस निर्णय के संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए हैं। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के अंतिम फैसले और जनता से मिलने वाले सुझावों पर टिकी हैं।

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