जबलपुर। यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर जमीयत उलमा-ए-जबलपुर मध्यप्रदेश ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए शुक्रवार को अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संगठन की ओर से यूसीसी समिति की अध्यक्ष एवं सदस्यों के नाम प्रेषित ज्ञापन में कहा गया कि प्रस्तावित कानून देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को प्रभावित कर सकता है तथा व्यक्तिगत धार्मिक कानूनों में हस्तक्षेप की आशंका पैदा करता है।
जमीयत उलमा-ए-जबलपुर के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद इकबाल नदवी के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि भारत विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है, जहां संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धार्मिक विश्वासों और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। संगठन का मत है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ कुरान और सुन्नत पर आधारित है तथा विवाह, तलाक, विरासत और पारिवारिक मामलों से जुड़े प्रावधान धार्मिक आस्था का अभिन्न हिस्सा हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि यूसीसी लागू होने की स्थिति में विभिन्न धार्मिक समुदायों की अलग पहचान और परंपराओं पर प्रभाव पड़ सकता है। संगठन ने यह भी कहा कि देश की ताकत उसकी विविधता में निहित है और सभी समुदायों को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
जमीयत उलमा के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद राशिद खान ने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले सभी धार्मिक समुदायों से व्यापक संवाद किया जाना आवश्यक है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा को सर्वोपरि बताते हुए इस विषय पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विचार-विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।
ज्ञापन के माध्यम से जमीयत उलमा-ए-जबलपुर मध्यप्रदेश ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण की मांग करते हुए यूसीसी के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है
