हिंदू एकता और जागरूकता का आह्वान, शहीद स्मारक में गूंजी हिंदू हुंकार

जबलपुर। राष्ट्रीय हिंदू स्वाभिमान मंच द्वारा आयोजित “हिंदू हुंकार सभा” गुरुवार को शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में उत्साह और जोश के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम में शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सामाजिक, धार्मिक एवं राष्ट्रवादी संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान हिंदू एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के संदेश गूंजते रहे।

सभा की मुख्य वक्ता और मुख्य अतिथि काजल हिंदुस्तानी रहीं। कार्यक्रम में मंच के संरक्षक मयाराम जैसवानी, विशिष्ट अतिथि गायत्री त्रिवेदी, कार्यक्रम संयोजक रामु अग्रवाल एवं कार्यक्रम संयोजिका डिंपी विश्वकर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

भारत माता के जयघोष से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण, पूजन-अर्चन एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उपस्थित जनसमूह ने भारत माता की जय और वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। इसके पश्चात अतिथियों का पुष्पहार एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।

समाज को संगठित और जागरूक रहने की जरूरत

मुख्य वक्ता काजल हिंदुस्तानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत त्याग, तपस्या, आध्यात्मिकता और सनातन संस्कृति की भूमि है। उन्होंने कहा कि समाज को जागरूक, संगठित और संस्कारित बनाकर ही सांस्कृतिक एवं सामाजिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।

उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे अपने परिवार और समाज में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य करें। विशेष रूप से युवाओं और बच्चों में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव विकसित करने पर जोर दिया गया।

मातृशक्ति की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

अपने संबोधन में काजल हिंदुस्तानी ने कहा कि मां ही परिवार की प्रथम गुरु और संस्कारों की पहली पाठशाला होती है। परिवार में दिए गए संस्कार ही बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं और उन्हें समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। उन्होंने महिलाओं से समाज निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

वीरांगनाओं के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश

उन्होंने भारतीय इतिहास की महान वीरांगनाओं रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर और रानी कमलापति का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने साहस, नेतृत्व और राष्ट्र समर्पण के आदर्श स्थापित किए हैं। वर्तमान पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक योगदान देना चाहिए।

सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर

सभा में वक्ताओं ने कहा कि समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय मूल्यों की मजबूती के लिए सभी सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता और नागरिक

कार्यक्रम में दुर्गेश रजक, नमामिशंकर महावर, सुशील उपाध्याय, रूपेश नायडू, बंटी रामरखवारी, हरीश आहूजा, राकेश लालवानी, प्रवीण भारद्वाज, निधि जैन, सीमा सिंह, प्रीति त्रिपाठी, अविनाश महावर, अमित शर्मा, दयाल जी, जेठा खत्री सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।

सभा के अंत में राष्ट्रहित, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया गया।

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