महंगाई की मार अब माल ढुलाई पर: जबलपुर में ट्रांसपोर्ट भाड़ा 25% बढ़ा

जबलपुर परचून ट्रांसपोर्ट संघ ने माल भाड़े में 25% वृद्धि की, व्यापारियों से सहयोग की अपील

जबलपुर। लगातार बढ़ती डीजल कीमतों, वाहनों के रखरखाव पर बढ़ते खर्च, टोल टैक्स, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों के वेतन में इजाफे के बीच जबलपुर के परिवहन कारोबार से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। जबलपुर परचून ट्रांसपोर्ट संघ ने माल परिवहन के भाड़े में 25 प्रतिशत वृद्धि करने की घोषणा की है। संघ द्वारा जारी पत्र के अनुसार यह बढ़ी हुई दरें 1 जून 2026 से लागू कर दी गई हैं। इस निर्णय का सीधा असर जबलपुर से विभिन्न शहरों और कस्बों में भेजे जाने वाले परचून एवं थोक सामानों के परिवहन पर पड़ेगा। संघ का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में परिवहन क्षेत्र की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके अनुपात में भाड़ा दरों में संशोधन नहीं किया गया था। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि पुराने भाड़े पर परिवहन कार्य करना आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है। इसी कारण संघ की बैठक में सभी सदस्यों की सहमति से भाड़े में वृद्धि का निर्णय लिया गया।

सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
जबलपुर परचून ट्रांसपोर्ट संघ के अध्यक्ष अभिषेक शुक्ला और सचिव मृदुल शुक्ला द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि संघ की बैठक में विभिन्न ट्रांसपोर्ट संचालकों और सदस्यों ने वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह बात सामने आई कि डीजल की कीमतों के अलावा वाहन संचालन से जुड़े लगभग सभी खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
संघ के अनुसार ट्रकों और मालवाहक वाहनों के टायर, इंजन ऑयल, स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत, बीमा और टैक्स जैसे खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं। इसके साथ ही परिवहन क्षेत्र में कार्यरत ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों के वेतन में भी वृद्धि हुई है। इन परिस्थितियों में पुराने भाड़े पर काम करना ट्रांसपोर्टरों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा था।

व्यापारियों से मांगा सहयोग
संघ ने अपने पत्र के माध्यम से शहर के व्यापारियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सहयोग की अपील भी की है। पत्र में कहा गया है कि परिवहन व्यवस्था व्यापारिक गतिविधियों की रीढ़ होती है और यदि ट्रांसपोर्ट संचालन आर्थिक रूप से प्रभावित होता है तो इसका असर पूरे व्यापारिक तंत्र पर पड़ता है।संघ ने कहा है कि भाड़े में वृद्धि का उद्देश्य किसी पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना है। यदि बढ़ती लागत के अनुरूप दरों में संशोधन नहीं किया गया तो ट्रांसपोर्ट संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे माल की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

बाजार पर पड़ सकता है असर
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि माल भाड़े में 25 प्रतिशत वृद्धि का असर धीरे-धीरे बाजार में दिखाई दे सकता है। परचून, किराना और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की ढुलाई लागत बढ़ने से कुछ वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है।हालांकि यह प्रभाव कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी अतिरिक्त परिवहन लागत को किस हद तक स्वयं वहन करते हैं और कितना हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। फिलहाल व्यापारिक संगठनों की ओर से इस निर्णय पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शहर के व्यापारिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका
जबलपुर परचून ट्रांसपोर्ट संघ शहर के प्रमुख परिवहन संगठनों में शामिल है और इसके माध्यम से बड़ी मात्रा में किराना, खाद्य सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुएं तथा अन्य व्यापारिक सामान जिले और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में संघ द्वारा लिया गया यह निर्णय व्यापार और परिवहन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि भविष्य में ईंधन और अन्य संचालन खर्चों में राहत मिलती है तो दरों की समीक्षा भी की जा सकती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भाड़े में वृद्धि अपरिहार्य हो गई थी।

Share This Article
Translate »