JABALPUR NEWS: मेडिकल कॉलेज में शुरू हुई हाईटेक MRI सुविधा, अब मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा निजी सेंटर

जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं उससे संबद्ध अस्पतालों में उपचार कराने आने वाले मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब मरीजों को एमआरआई (MRI) जांच के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मेडिकल कॉलेज परिसर में शासन द्वारा स्वीकृत अत्याधुनिक हाईटेक एमआरआई मशीन स्थापित कर दी गई है और इसकी सेवाएं 3 जून से शुरू कर दी गई हैं।

मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. नवनीत सक्सेना ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करते हुए सभी विभागाध्यक्षों, अधीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अब एमआरआई से जुड़ी सभी जांचें मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थापित नई मशीन पर ही कराई जाएं।

मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

अब तक मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध अस्पतालों में भर्ती या उपचाररत मरीजों को एमआरआई जांच के लिए निजी सेंटरों पर भेजा जाता था। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त खर्च के साथ-साथ समय और आवागमन की परेशानी भी उठानी पड़ती थी।

नई मशीन शुरू होने से मरीजों को एक ही परिसर में जांच की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे गंभीर और आपातकालीन मामलों में भी जांच प्रक्रिया तेज हो सकेगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उपचार की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार आएगा।

सभी विभागों को जारी किए गए निर्देश

डीन कार्यालय द्वारा जारी आदेश में संयुक्त संचालक एवं अधीक्षक, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अधीक्षक, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन सहित मेडिकल कॉलेज के सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि एमआरआई से संबंधित सभी प्रकार की जांचें अब कॉलेज परिसर में स्थापित मशीन पर ही कराई जाएं।

आदेश में कहा गया है कि संस्थान में सुविधा उपलब्ध होने के बाद बाहरी एजेंसियों से जांच कराना उचित नहीं माना जाएगा।

निजी सेंटर भेजने पर विभागाध्यक्ष होंगे जिम्मेदार

कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि अस्पताल परिसर में एमआरआई सुविधा शुरू होने के बाद मेसर्स सान्या प्राइम डायग्नोस्टिक्स अथवा किसी अन्य निजी केंद्र से एमआरआई जांच नहीं कराई जाएगी।

यदि आदेश लागू होने के बाद भी किसी विभाग द्वारा मरीजों को निजी सेंटर भेजा जाता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागाध्यक्ष की होगी। साथ ही ऐसे मामलों में बाहरी जांच के बिलों का भुगतान मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा नहीं किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं में होगा बड़ा सुधार

मेडिकल कॉलेज प्रशासन का मानना है कि नई हाईटेक एमआरआई मशीन शुरू होने से न केवल मरीजों को बेहतर और त्वरित जांच सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को विशेष राहत मिलेगी, जिन्हें निजी केंद्रों में महंगी जांच कराने के लिए मजबूर होना पड़ता था।

डीन ने क्या कहा

मेडिकल कॉलेज के डीन प्रो. डॉ. नवनीत सक्सेना ने बताया कि अस्पताल परिसर में नई एमआरआई मशीन शुरू कर दी गई है। इसके संबंध में सभी विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि मरीजों की एमआरआई जांच अब मेडिकल कॉलेज में ही कराई जाए। नई सुविधा शुरू होने से मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उपचार प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।

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